*उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से हटाये जायेंगे कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय संचालित करने वाले गैर-सरकारी संगठन -एनजीओ ।
*समग्र शिक्षा अभियान के प्राविधानों के विपरीत कार्यों को लेकर केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने जारी किया नोटिस ।
*उत्तर प्रदेश सहित अन्य सभी राज्यों को पत्र भेजकर नियमित सरकारी शिक्षकों सहित केजीबीवी में कार्यरत फुल टाइम टीचर की योग्यता व राज्यों द्वारा दिए जा रहे वेतन संरचना की जानकारी शिक्षा मंत्रालय ने माँगी ।
लखनऊ । शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार का स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने समग्र शिक्षा अभियान के दिशा निर्देशों व नई शिक्षा नीति में वर्णित मान व मानकों के अनुसार स्कूली व्यवस्था में बदलाव को लेकर सख्त कदम उठाने जा रहा है. जिसमें आने वाले समय में देश के पाँच हजार छह सौ उन्तालिस कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों में व्यापक बदलाव होंगे ।
शिक्षा मंत्रालय का स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने देश के 27 राज्यों व 3 केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजकर 5639 कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों से सम्बंधित कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने को कहा है जिससे राज्यों में खलबली मची है सबसे ज्यादा नुकसान ठेके पर स्कूलों का संचालन कर रहे गैर-सरकारी संगठन -एनजीओ पर पड़ेगा. अकेले उत्तर प्रदेश में ही दर्जनों के करीब एनजीओ स्कूल संचालन करा रहे हैं अब इनके ऊपर मंत्रालय ने लगाम लगाई है. संगठनों की लगातार शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए पहली बार शिक्षा मंत्रालय ने देश के राज्यों से लिस्ट माँगी है. कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल बंसल ने बताया कि सबसे ज्यादा एनजीओ से संचालित राज्यों में पहले नम्बर पर मध्य प्रदेश राज्य है जहाँ 207 केजीबीवी एनजीओ से व 201 केजीबीवी राज्य शिक्षा विभाग के स्वामित्व से संचालित हैं वहीँ दूसरे नम्बर पर नागालैंड राज्य है जहाँ टोटल 22 केजीबीवी विद्यालय है जो सिर्फ एनजीओ द्वारा ही संचालित हो रहे हैं राजस्थान में भी 7 एनजीओ कार्यरत हैं जिनमें 200 केजीबीवी स्कूल यूनिसेफ, संधान, फेडरेशन आफ स्कूल एजुकेशन गर्ल ग्लोबली, बोध, सेव द चिल्ड्रेन, प्लान इंडिया, आरकेसीएल सहित एजेंसी से संचालित हैं तथा 116 राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित है. झारखण्ड में सडपा इंडिया, ओड़िसा में केयर, उन्फ्पा, अरुणाचल प्रदेश में आर के मोस्संग, ओजू वेलफेअर, हरियाणा में मेवात मॉडल स्कूल सहित मणिपुर, मेघालय, आसाम, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक राज्यों में एनजीओ द्वारा संचालित किये जा रहे हैं इनके संचालन में बहुत सी शिकायते आती हैं ।
वही शिक्षा मंत्रालय ने लंबित मामलों को संज्ञान में लेते हुए समग्र शिक्षा अभियान के करिकुलम में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से सरकारी स्कूलों में नियमित शिक्षकों के वेतन के साथ-साथ नियमित (पूर्णकालिक) केजीबीवी शिक्षकों की योग्यता और वेतन संरचना के बारे में विवरण प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया है. तथा गैर-कार्यात्मक केजीबीवी की स्थिति सहित उनके स्थान में परिवर्तन के किसी भी प्रस्ताव सहित उन्हें चालू करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी माँगी है. सबसे महत्वपूर्ण केजीबीवी को राज्य शिक्षा विभाग के नियंत्रण में लाने के उपाय और समयसीमा निर्धारण किये जाने को कहा है. कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल बंसल ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय केजीबीवी में कार्यरत अन्य सभी श्रेणी के कर्मचारियों वार्डन, पार्टटाइम टीचर, उर्दू टीचर, लेखाकार, कुक, चपरासी व चौकीदारों के वेतन विसंगतियों को देखते हुए सभी राज्यों से उनका भी डाटा मंगवाये. और नीति आयोग, समग्र शिक्षा अभियान फ्रेमवर्क सहित एनसीआरटी के रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए जवाहर नवोदय विद्यालय समिति कि भांति कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय समिति का गठन करते हुए सभी राज्यों में कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करें
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